रांची हिंदू सम्मेलन: निशा उरांव बोले- आदिवासी और सनातन समाज की जड़ें एक समान
निशा उरांव ने रांची में हिंदू सम्मेलन में कहा कि आदिवासी और सनातन समाज की जड़ें एक ही सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी हैं, दोनों प्रकृति का सम्मान करते हैं। उन्होंने आदिवासी परंपराओं के संरक्षण और विविधता में एकता पर जोर दिया।
समाज सेवा में सक्रिय और आयकर पदाधिकारी निशा उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज और सनातन समाज की जड़ें एक ही सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी हुई हैं। दोनों ही परंपराएं प्रकृति को पूजनीय मानती हैं और धरती को माता के रूप में सम्मान देती हैं।
आदिवासी समाज की पूजा पद्धति और परंपराएं अत्यंत प्राचीन हैं और इन्हें संरक्षित रखने की आवश्यकता है। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रांची के कडरू स्थित कपिलदेव स्कूल के मैदान में आयोजित हिंदू सम्मेलन में अपना बात रख रही थी।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता विविधता में एकता है। अलग-अलग पूजा पद्धतियों और परंपराओं के बावजूद सभी का लक्ष्य मानवता, प्रकृति और समाज के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ाना है।
रक्षा के लिए प्रयास करना चाहिए
उन्होंने हिंदू समाज से आह्वान किया कि समाज को विभाजित करने वाली शक्तियों से सावधान रहने की आवश्यकता है और सभी को मिलकर अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए प्रयास करना चाहिए। कहा कि आदिवासी समाज की परंपराएं, गीत, संगीत और सांस्कृतिक धरोहर अत्यंत मूल्यवान हैं और इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
इसके साथ ही सम्मेलन में उपस्थित सभी वक्ताओं ने समाज के विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज में आपसी सहयोग, समरसता और संगठन की भावना को मजबूत किया जाए। हिंदू समाज की शक्ति उसकी एकता में है। जब समाज एकजुट होकर आगे बढ़ता है, तभी वह किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम होता है। लोगों पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की भी बात कही। कार्यक्रम के पारंभ में शोभायात्रा भी निकाली गई।
हिंदू समाज को अपनी पहचान, अपने इतिहास और अपनी परंपराओं के बारे में जागरूक होना होगा :
सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वामी सत्यनारायण सौमित्र ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल संदेश “धर्मो रक्षति रक्षितः” है। जब समाज अपने धर्म, संस्कृति और मूल्यों की रक्षा करता है, तभी धर्म भी उसकी रक्षा करता है।
हिंदू समाज को अपनी पहचान, अपने इतिहास और अपनी परंपराओं के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। यदि समाज संगठित और जागृत रहेगा तो कोई भी शक्ति उसे कमजोर नहीं कर सकती। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
जिम्मेदारी को समझना अत्यंत आवश्यक
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सहिष्णुता, समरसता और मानवता का संदेश देती है, लेकिन इसके साथ-साथ समाज को अपनी सुरक्षा और आत्मसम्मान के प्रति भी सजग रहना चाहिए। आज के समय में परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी को समझना अत्यंत आवश्यक है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करेगा तो राष्ट्र स्वतः मजबूत होगा।
इस अवसर पर रांची महानगर के कार्यवाह दीपक पांडेय ने कहा कि जाति, वर्ग या क्षेत्र के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव समाज को कमजोर करता है। भारतीय संस्कृति का मूल संदेश “सर्वे भवन्तु सुखिनः” और “वसुधैव कुटुम्बकम्” है, जो पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की प्रेरणा देता है। इसलिए सभी को मिलकर समाज में समानता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना चाहिए। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित थे।

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