Gas Cylinder Shortage in Ranchi: सुबह से लाइन में लगने को मजबूर लोग

रांची में गैस सिलिंडर की भारी किल्लत से लोग परेशान हैं। वितरण केंद्रों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहाँ उपभोक्ता घंटों धूप में खड़े रहने को मजबूर हैं। कई लोग खाली हाथ लौट रहे हैं।

Gas Cylinder Shortage in Ranchi: सुबह से लाइन में लगने को मजबूर लोग

जागरण संवाददाता, रांची। शहर में गैस सिलिंडर की भारी किल्लत ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बुधवार को विभिन्न वितरण केंद्रों पर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जहां लोग सुबह से लेकर दोपहर तक कड़ी धूप में भूखे-प्यासे खड़े रहे। कई घंटों के इंतजार के बाद कुछ लोगों को सिलिंडर मिल पाया, जबकि बड़ी संख्या में लोग निराश होकर वापस लौट गए।

लोगों ने बताया कि गैस सिलिंडर पाने के लिए सुबह 5 बजे से ही लाइन में लगना पड़ रहा है। जो लोग देर से पहुंचे, उन्हें अक्सर खाली हाथ लौटना पड़ता है। पुंदाग स्थित आनंद गैस एजेंसी में बुधवार को गैस वितरण होना था, लेकिन सिलेंडर लेकर गाड़ी दोपहर एक बजे पहुंची। इससे उपभोक्ताओं में आक्रोश फैल गया और लोगों ने एजेंसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया।

दूसरे क्षेत्रों में भी यही हाल

सामलौंग समेत शहर के अन्य इलाकों में भी स्थिति चिंताजनक रही। यहां दोपहर 12 बजे तक गैस की गाड़ियां नहीं पहुंचीं, जिससे लोग घंटों तक धूप में खड़े रहने को मजबूर हुए। कई लोग सिलेंडर लेकर लाइन में खड़े रहे, लेकिन वितरण शुरू होने से पहले ही स्टाक खत्म हो गया।

उपभोक्ताओं ने बताया कि उनके घरों में एक ही सिलिंडर उपयोग में है, जो कभी भी खत्म हो सकता है। ऐसे में दूसरा सिलिंडर लेने के लिए उन्हें घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है, ताकि खाना बनाने में दिक्कत न हो।

सप्लाई कम, बुकिंग ज्यादा

गैस एजेंसियों के अनुसार हर एजेंसी के पास 3 से 4 हजार बुकिंग पेंडिंग है और यह संख्या प्रतिदिन करीब 5 प्रतिशत बढ़ रही है। वहीं सप्लाई के तौर पर रोजाना सिर्फ 500 से 550 सिलिंडर ही उपलब्ध हो पा रहे हैं। इस असंतुलन के कारण स्थिति और बिगड़ती जा रही है।

ईद और सरहुल जैसे त्योहारों के कारण गैस की मांग और बढ़ गई है। ऐसे समय में सिलिंडर की कमी से लोगों में नाराजगी है। उपभोक्ताओं का कहना है कि त्योहार के मौके पर भी उन्हें समय पर गैस नहीं मिल पा रही है, जिससे घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है।

कालाबाजारी का भी आरोप

लोगों ने आरोप लगाया है कि शहर में गैस सिलिंडर की कालाबाजारी चरम पर है। कुछ एजेंसी कर्मियों की मिलीभगत से बिना बुकिंग के घरेलू सिलेंडर 1500 से 2000 रुपये तक में बेचे जा रहे हैं। मजबूरी में लोग अधिक कीमत देकर भी गैस खरीदने को तैयार हैं, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

पीएनजी सेवा नहीं, विकल्प भी सीमित

उपभोक्ताओं का कहना है कि शहर के कई इलाकों में अब तक पाइप्ड नेचुरल गैस सेवा शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में लोग एलपीजी पर ही निर्भर हैं। आधुनिक घरों में लकड़ी या कोयले का उपयोग करना संभव नहीं है, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है।

एजेंसी संचालकों का कहना है कि जब तक 25 दिनों की अनिवार्य अवधि (बुकिंग अंतराल) में राहत नहीं दी जाएगी, तब तक समस्या बनी रहेगी। उपभोक्ताओं ने भी सरकार से मांग की है कि गैस की आपूर्ति बढ़ाई जाए और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि उन्हें इस जादोजहद से राहत मिल सके।

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