Sunny Sanskari Ki Tulsi Kumari Review : Desi Romance Mein Modern Twist

Sunny Sanskari Ki Tulsi Kumari Review : Desi Romance Mein Modern Twist


Sunny Sanskari Ki Tulsi Kumari” 2025 की एक बॉलीवुड रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है, जिसका निर्देशन शशांक खैतान ने किया है। मुख्य भूमिका में वरुण धवन (Sunny) और जान्हवी कपूर (Tulsi) हैं। इसके अलावा फिल्म में सना मल्होत्रा, रोहित सार्फ आदि कलाकार भी हैं। 


इस फिल्म में पारंपरिक शादी, पूर्व-प्रेमी-प्रेमिका संबंध, पारिवारिक दबाव और “प्यार जीतना” जैसा आम बॉलीवुड विषय है। समीक्षा करते वक्त यह देखना ज़रूरी है कि क्या इस पुराने फार्मूले के बीच भी कुछ ताज़ा, कुछ नया देखने को मिलता है या फिर यह सिर्फ चमक-दमक भर है।





कथा सार (Plot Summary)



फिल्म की पटकथा इस तरह आगे बढ़ती है:


  • सनी (Sunny) अपनी प्रेमिका अनन्या (Ananya) को शादी के लिए प्रपोज़ करने वाला है। वह बहुत आशान्वित है।  
  • लेकिन अनन्या उसे इंकार कर देती है और कहती है कि उनका रिश्ता असल में कभी “रिश्ता” ही नहीं था—यह एक तरह का “situationship” था।  
  • उसके बाद अनन्या ने विक्राम (Vikram) से शादी तय कर ली है।  
  • सनी पता लगाता है कि विक्रम की पूर्व प्रेमिका तुलसी कुमारी (Tulsi Kumari) थी, जिसे परिवार कारणों से पीछे छोड़ दिया गया था।  
  • सनी मुलाकात करता है तुलसी से, और दोनों मिलकर अनन्या–विक्राम की शादी में जाते हैं, “प्रेतित जोड़ी” के रूप में आकर माहौल उलटने की कोशिश करते हैं। उनके इस मंसूबे से कई भ्रम, हास्य और भावनात्मक मोड़ सामने आते हैं।  
  • अंत में, विक्रम को एहसास होता है कि उसने तुलसी की कीमत नहीं समझी। लेकिन तुलसी अब बदल चुकी होती है—वह कमजोर नहीं है। सनी की सच्ची भावनाएँ भी सामने आती हैं। अंततः, तुलसी सनी को चुनती है।  



यह कहानी पारंपरिक विषयों पर आधारित है—पूर्व प्रेम, शादी, विरोधी परिवार और अंततः प्रेम की जीत—कुछ मोड़ तो पुराने बॉलीवुड फिल्मों में कई बार देखे गए हैं।





कलाकार और अभिनय (Cast & Performances)




वरुण धवन (Sunny)



वरुण धवन इस फिल्म में अपनी पुरानी शैली में हैं—हास्य, संवाद, मंचन, नाटक। कई समीक्षकों ने उनकी ऊर्जा, कॉमिक टाइमिंग और स्टेज प्रेजेंस की तारीफ़ की है। 


हालाँकि, कुछ आलोचनाएँ कहती हैं कि वे जब अभिनय के बहुत गहरे भावों में जाएँ, तो कमजोर पड़ जाते हैं। 



जान्हवी कपूर (Tulsi Kumari)



जान्हवी कपूर ने तुलसी की भूमिका में कोशिश की है कि वह एक साधारण व्यक्ति — कमजोर, लेकिन संघर्षशील — का भाव सामने लाएँ। कुछ दृश्य जहाँ तुलसी खुद को स्थापित करती है, उन्होंने अच्छा अभिनय दिखाया है। 


लेकिन कई समीक्षाएँ कहती हैं कि उनका किरदार आंशिक रूप से अधूरा है — बहुत अधिक प्रेरक विकास न देख पाते हैं। 



अन्य कलाकार



  • सना मल्होत्रा (Ananya) और रोहित सार्फ (Vikram) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी भूमिकाएँ सीमित थीं, लेकिन कहानी में मोड़ देने में योगदान करती हैं।  
  • मनीष पॉल जैसे सपोर्टिंग पात्रों ने हास्य-रस में सहयोग दिया।  
  • प्राजक्ता कोली ने एक कैमो भूमिका की, जिसे दर्शकों ने सोशल मीडिया पर सराहा।  



कुल मिलाकर, कलाकारों ने अपनी भूमिका निभाने की पूरी कोशिश की, लेकिन कमजोर पटकथा और सीमित चरित्र विकास ने उन्हें पूरी तरह से चमकने नहीं दिया।





निर्देशन और पटकथा (Direction & Screenplay)




निर्देशन — शशांक खैतान



शशांक खैतान की पहचान पारिवारिक-रोमांटिक कहानियों में हल्की-फुलकी मसाला जोड़ने की है। इस फिल्म में उन्होंने वही शैली बरकरार रखी है—उत्सव, शादी, नाटक, प्रेम-उलझन। 


लेकिन आलोचनाएँ यह कहती हैं कि इस बार निर्देशन थोड़ा अधूरा महसूस होता है—निर्देशक कई तरह की रस्मी दुविधाओं और भावनात्मक आरोह-वरोहों को संतुलित करने में जूझता नज़र आता है। 


कुछ दृश्यों में दृश्य आकर्षक हैं, लेकिन बहुत जगहों पर निर्देशक “दिखावे” पर ज़्यादा ध्यान देता हैं बजाय कि भावनाओं को गहराई देने के। 



पटकथा, संवाद, संरचना



पटकथा (script) मूलतः पुरानी कथा-आधार पर है — “पूर्व प्रेमी वापस आने की कोशिश” + “शादी रुकवाने की ढेर सारी नाटकीय चालें”। 


संवाद कई जगह हल्का-फुलका और मनोरंजक है, संवाद लेखन की कुछ लाइनें चर्चित भी हो रही हैं। लेकिन गहराईदार संवाद या नया संदेश नहीं मिलता। 


संरचना (structure) थोड़ी खींची खींची लगती है—कुछ हिस्से जहां कहानी तेज़ हो सकती थी, वहाँ बहुत खिंच जाती है। 


इससे फिल्म का “मध्य भाग” कमजोर हो जाता है, और दर्शक कहीं-कहीं ऊब महसूस कर सकते हैं।





संगीत, गीत और दृश्य प्रस्तुति (Music, Songs & Visuals)




संगीत और गीत



फिल्म में कुछ गीत पहले से ही चर्चा में हैं:


  • “Bijuria”
  • “Panwadi”
  • “Perfect” — गुरु रंधावा द्वारा प्रस्तुत एक नया गीत, जिसमें जान्हवी कपूर और वरुण धवन ने नज़र आते हैं, जिसमें दृश्य कुछ ओरिजिनल हैं जैसे पैसे की इस्त्री करना या आभूषण खाना आदि।  
  • “Perfect” गीत की म्यूज़िक और दृश्यों को सहज और मज़ेदार कहा गया है।  



गीतों का मिक्स समकालीन और पारंपरिक बॉलीवुड स्टाइल का है — कुछ हिट नंबरों की तरह बातें होती हैं, पर वे “दबदबा” नहीं छोड़ पाते। 



दृश्य प्रस्तुति और सिनेमाटोग्राफी



फिल्म की सेटिंग, शादी समारोह, भव्य परिधान और रंगीन नज़ारे आकर्षक हैं। शादी और उत्सव की रंगत को दिखाने में फिल्म सफल है। 


लेकिन कई समीक्षाएँ कहती हैं कि इस “दिखावे” पर ज़्यादा जोर देना, दृश्य खूबसूरती पर टेक्सचर (screenplay) की कमी को छुपाने की कोशिश जैसी लगती है। 


कुल मिलाकर, संगीत और दृश्य स्तर पर फिल्म कुछ पल मनोरंजन देती है, लेकिन वो पल स्थायी रूप से दिल में नहीं टिकते।





मज़बूती और कमियाँ (Strengths & Weaknesses)




मज़बूती (Strengths)



  1. मनोरंजक पल — हास्य, डांस, हल्की रोमांचक सीन्स, इमोशन की संतुलित छुवन।
  2. कलाकारों की अभिनय ऊर्जा — वरुण धवन ने अपनी स्टाइल से फिल्म को थोड़ा ऊँचा उठाया।
  3. गीत और संगीत — “Perfect” जैसी ताज़ी धुन ने दर्शकों को आकर्षित किया।
  4. दृश्य और सेटिंग — शादी, उत्सव, पोशाक आदि का भव्य चित्रण।
  5. रोम-कॉम का हल्का वक्त-निकासी मनोरंजन — अगर आप कुछ भारी न देखना चाहते हों, तो यह फिल्म हद तक उस भूमिका को निभाती है।




कमियाँ (Weaknesses)



  1. पटकथा की कमी — कहानी बहुत पुरानी और अनुमानित लगती है; आश्चर्य या नया मोड़ कम है।
  2. चरित्र विकास का अभाव — मुख्य पात्रों में गहराई न दिखने के कारण उनके फैसले पूरी तरह समझ नहीं आते।
  3. भावनात्मक वजन की कमी — जब दुख, उलझन या संघर्ष आता है, वह पूरी तरह असर नहीं करता।
  4. मध्य भाग में आलस्य — कहीं कहीं कहानी ठहर जाती है, गति धीमी हो जाती है।
  5. दिखावे पर ज़्यादा भरोसा — बहुत सारे दृश्य सौंदर्य और गाला-शो जितना ही प्रभाव छोड़ते हैं, ज़्यादा नहीं।
  6. क्लाइमैक्स की जल्दबाज़ी — अंत कुछ हिस्सों में अधूरा या “पल में सुलझा लिया” जैसा लगता है।



ये कमियाँ इस फिल्म को “औसत व्यवसाय” से ऊपर नहीं उठने देती, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि फिल्म बुरी है — सिर्फ यह उच्च-उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाती।





दर्शकों और समीक्षकों की प्रतिक्रिया




समीक्षाएँ



  • Hindustan Times ने लिखा है कि फिल्म “स्पष्टता की कमी” से जूझती है; यह रोमांस और पारिवारिक ड्रामा दोनों बनना चाहती है, लेकिन दोनों में स्थिर निर्णय नहीं ले पाती।  
  • Rediff.com ने इसे “fluff” (हल्की मनोरंजन) फिल्म कहा—बिना बड़ी टकराव या गंभीर विषय के, सिर्फ मनोरंजन हेतु।  
  • Indian Express समीक्षा में कहा गया कि दृश्य-शोभा इतनी ज़्यादा हो गई कि पटकथा और दिल को जगह कम मिली।  
  • Lensmen Reviews ने इसे “एक ध्वन्यात्मक गड़बड़” कहा — यानि यह न तो पूरी तरह सफल कॉपी है, न ही अपनी पहचान बना पाई।  
  • India Forums समीक्षा में कहा गया कि यह “रंगीन, मज़ेदार और कभी-कभी आकर्षक” फिल्म है, लेकिन “छू न सके” वाली भी।  
  • India Today ने टिप्पणी की कि वरुण की अगुवाई कमजोर लगती है, फिल्म “lukewarm rom-com” (उदासीन रोम-कोम) है।  




दर्शक प्रतिक्रियाएँ (Netizens)



  • ट्विटर / X पर कुछ लोगों ने इसे “feel-good family entertainer” कहा है — हल्की-फुल्की हंसी-मज़ाक और पारिवारिक माहौल के लिए ठीक।  
  • सोशल मीडिया पर यह चर्चा रही कि सना मल्होत्रा इस फिल्म का गाना “Perfect” में क्यों नहीं दिखी — लोग कह रहे हैं कि उन्हें किनारे किया गया।  
  • Reddit पर एक यूज़र ने लिखा:



“It is a one-time watch, the story is predictable and yet I had some fun watching this! It was funny in a silly kinda way.” 


इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि अधिकांश दर्शक फिल्म को “एक बार देखने योग्य” समझते हैं—बहुत अधिक अपेक्षा न रखकर।





बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन और व्यावसायिक दृष्टिकोण



  • पहले दिन (Day 1) फिल्म ने लगभग ₹9.25 करोड़ की नेट कमाई की।  
  • बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट्स कहती हैं कि शुरुआत सामान्य रही, और फिल्म को शुरुआत में “double digit” (दो अंकीय) कमाई दर्ज की गई।  
  • लेकिन यह पहले दिन “Baby John” की कमाई को पार नहीं कर सकी।  
  • समीक्षकों और बाज़ार विश्लेषकों की राय है कि फिल्म अपनी प्रतिभा या नयेपन से बाज़ार पर कोई बड़ा झटका नहीं दे पाएगी, लेकिन त्योहार और आसान मनोरंजन श्रेणी होने की वजह से कुछ दर्शकों को खींच सकती है।  
  • “Kantara: Chapter 1” जैसी फिल्मों की सफलता और प्रतिस्पर्धा से इस फिल्म को अलग जगह बनाना कठिन होगा।  



तो व्यावसायिक रूप में कहा जाए, तो यह फिल्म “बेहतर से औसत” श्रेणी में रहेगी — न तो बहुत बड़ी सफलता, न बहुत बड़ी असफलता।





विश्लेषण: क्यों यह फिल्म इस तरह बनी?



कई कारण हैं जिनकी वजह से “Sunny Sanskari Ki Tulsi Kumari” में ऐसा मिश्रित अनुभव मिलता है:


  1. फार्मूला-आधारित कहानी — बॉलीवुड में “पहले प्रेम, तो टकराव, फिर पुनर्मिलन” जैसा स्वरूप बार-बार प्रयोग हुआ है। इस फिल्म ने नया मोड़ न दे पाई।
  2. उच्च उम्मीदें — वरुण + जान्हवी + बड़े प्रोड्यूसर + शादी थीम = अपेक्षा बहुत बढ़ जाती है।
  3. दिखावट और ग्लैमर पर जोर — फिल्म ने बहुत ज़्यादा वातावरण, संगीत और सेट डिज़ाइन पर पैसा लगाया; लेकिन दलदल में भावनात्मक धरती कमजोर पड़ी।
  4. संवाद-लेखन और चरित्र सौम्यता — संवाद कहीं-कहीं मज़ेदार हैं, लेकिन वे चरित्रों को जीवंत नहीं बनाते।
  5. समय प्रबंधन — फिल्म की लंबाई और ट्रांज़िशन (एक दृश्य से दूसरे दृश्य में बदलाव) कहीं कहीं थका देने वाला लगता है।
  6. निर्णय की कमी — कई जगह फिल्म “क्या होना चाहिए?” के बीच झूलती हुई सी दिखती है — रोमैंस रहे या पारिवारिक ड्रामा, या दोनों।



इन सबका परिणाम यह है कि यह फिल्म “मनोरंजन की खिड़की” भर है—कोई नई बात नहीं, लेकिन टूटते वक़्त थोड़ा समय निकालने के लिए ठीक है।


Post a Comment

0 Comments