पश्चिम सिंहभूम जिले के घने सारंडा जंगल एक बार फिर माओवादी हिंसा से दहल उठे हैं। ताजा घटना गुदड़ी प्रखंड के हाथीबुरु गांव की है, जहां रविवार देर रात माओवादियों ने एयरटेल कंपनी के एक मोबाइल टावर को आग के हवाले कर दिया। इस घटना से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई है और ग्रामीणों के बीच भय का माहौल बना हुआ है।
घटना कैसे हुई
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, देर रात करीब 11 बजे हथियारों से लैस करीब 10–12 माओवादी गांव में पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले मोबाइल टावर के परिसर में मौजूद कर्मचारियों को बंधक बना लिया ताकि कोई पुलिस या प्रशासन को सूचना न दे सके। इसके बाद उन्होंने टावर में आग लगाने से पहले कई गोलियां भी चलाईं, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
माओवादियों ने टावर के पास पोस्टर भी छोड़े हैं, जिनमें सरकार और निजी कंपनियों को जंगलों में विकास कार्य बंद करने की चेतावनी दी गई है। पोस्टरों में यह भी लिखा गया है कि अगर स्थानीय लोगों की अनदेखी की गई या सुरक्षा बलों की गतिविधियां जारी रहीं, तो और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।
कर्मचारियों ने बताई आपबीती
एयरटेल टावर के एक तकनीकी कर्मचारी ने बताया कि माओवादी समूह अचानक वहां पहुंचा और मोबाइल फोन जब्त कर लिए। उन्होंने सभी कर्मचारियों को एक जगह बैठाकर धमकी दी कि अगर किसी ने भागने या सूचना देने की कोशिश की, तो परिणाम गंभीर होंगे। कुछ देर बाद माओवादी टावर में आग लगाने के बाद जंगल की ओर फरार हो गए।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना मिलते ही गुदड़ी थाना पुलिस और सीआरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची। सोमवार सुबह पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और जल चुके टावर के मलबे को जब्त किया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इलाके में माओवादियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। आसपास के गांवों में भी पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है और ग्रामीणों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
संचार व्यवस्था ठप
एयरटेल टावर जल जाने के कारण पूरे गुदड़ी प्रखंड और आसपास के कई गांवों में मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह ठप हो गया है। इससे आम लोगों के साथ-साथ प्रशासनिक कामकाज पर भी असर पड़ा है। स्थानीय लोग अब पास के ब्लॉक या कस्बे जाकर ही फोन कर पा रहे हैं।
ग्रामीणों में डर का माहौल
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से इलाके में माओवादियों की आवाजाही बढ़ी है। कई बार उन्होंने गांवों में बैठकें की हैं और लोगों से सुरक्षा बलों का साथ न देने की चेतावनी दी है। रविवार की घटना के बाद गांव के लोग रात में घरों से निकलने से भी डर रहे हैं। स्कूल और बाजारों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
पश्चिम सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक ने कहा कि घटना बेहद गंभीर है और इसमें शामिल सभी माओवादियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने बताया कि फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया है ताकि आगजनी में इस्तेमाल किए गए केमिकल्स या विस्फोटक पदार्थों की जांच की जा सके। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है ताकि लोगों में सुरक्षा की भावना बनी रहे।
सुरक्षा बलों की सर्च ऑपरेशन तेज
सुरक्षा बलों ने सारंडा जंगल के विभिन्न हिस्सों में सघन सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि माओवादी संगठन के शीर्ष नेता इस इलाके में छिपे हो सकते हैं। पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ड्रोन की मदद से इलाके की निगरानी कर रही है। जंगल के कई हिस्सों में रास्तों पर नाकेबंदी की गई है ताकि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा जा सके।
इलाके में माओवादियों की पुरानी पकड़
सारंडा का इलाका वर्षों से माओवादियों का गढ़ माना जाता रहा है। यहां के घने जंगल, दुर्गम पहाड़ियां और सीमित पुलिस पहुंच के कारण नक्सली संगठन अक्सर सक्रिय रहते हैं। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने कई अभियानों के जरिए माओवादियों की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की है, लेकिन बीच-बीच में इस तरह की घटनाएं यह दिखाती हैं कि उनकी जड़ें अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
ग्रामीण विकास पर असर
इस घटना का असर अब इलाके के विकास कार्यों पर भी दिखने लगा है। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से कई योजनाओं के काम फिलहाल रोक दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि माओवादियों के डर से कोई भी मजदूर अब जंगल के अंदर काम करने नहीं जा रहा। इससे मनरेगा, सड़क निर्माण और मोबाइल नेटवर्क विस्तार जैसे काम अधर में लटक गए हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य सरकार ने घटना की निंदा करते हुए कहा है कि माओवादियों की ऐसी हरकतें विकास के रास्ते में बाधा नहीं बनने दी जाएंगी। गृह विभाग ने पश्चिम सिंहभूम जिले के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा बलों की उपस्थिति बढ़ाई जाए और ग्रामीणों का विश्वास बहाल किया जाए।
स्थानीय लोगों की मांग
गांव के लोगों ने सरकार से मांग की है कि टावर को जल्द से जल्द दोबारा चालू किया जाए ताकि मोबाइल नेटवर्क बहाल हो सके। साथ ही, उन्होंने इलाके में स्थायी पुलिस चौकी की स्थापना की भी मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ेगी तो माओवादी फिर से इस तरह की घटना करने से पहले सौ बार सोचेंगे।

0 Comments